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आज की रात

आज मैंने अपने दोस्तों को मेरे घर पे दावत बुलाया. हमने खाना बनाया फिर मेरे घर के पीछेवाले वन में घूमने गए. धुप अभी भी हो रहा था. थोड़े घूमने के बाद हमने अन्दर आके चाय बनायी. फिर हमने बैठकर चाय पीते हुए बातचीत की.
एक घंटे बाद वे चले गए और मैं अपनी कुत्तिया के साथ चलने को फिर से बाहर गया. मैं अपने हाथ में टोर्च रख लिया. अब तक काफी अँधेरा हुआ था, और मैं अपने सामने बस दो तीन मीटर देख सका. एक वाणी आई, और मैं और अपनी कुत्तिया डर गए. वह आवाज़ सुनकर भाग गयी, जैसे की वह वाणी का स्रोत खोजनी की खोशीश करे. मैंने फिर से विचित्र वाणी सुन ली, फिर वाणी की और टोर्च जलाया. टोर्च की रौशनी में दो आँखें चमकनी लगीं. अब मैं काफी डर बैठा.

फिर अचानक जो दो चमकीली आँखें मेरे और दौरनी लगीं. मुझे उम्मीद नहीं थी की क्या वे मेरी कुत्तिया की या कोई और जानवर की. अँधेरे से मेरी कुत्तिया के रूप ने दिखाई दिया और मुझे काफी राहत हुआ.
हम दोनों अन्दर आये, और मैंने फैलसा किया की आज की रात फिर से बाहर नहीं जाऊँगा.

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    आज की रात

    आज मैंने अपने दोस्तों को मेरे घर पे दावत पे(पर) बुलाया. हमने खाना बनाया फिर मेरे घर के पीछेवाले वन में घूमने गए. धुप धूप अभी भी हो रहा था  थी. थोड़े थोड़ा घूमने के बाद हमने अन्दर आके चाय बनायी. फिर हमने बैठकर चाय पीते हुए बातचीत की.
    एक घंटे बाद वे चले गए और मैं अपनी कुतिया के साथ टहलने(या घूमने) को फिर से बाहर गया. मैं अपने हाथ में टोर्च रख लिया. अब तक काफी अँधेरा हुआ हो गया था, और मैं अपने सामने बस दो तीन मीटर देख सका सकता था. एक आवाज़ आई, और मैं और अपनी मेरी कुत्तिया डर गए. वह आवाज़ सुनकर भाग गयी, जैसे की वह  आवाज़ का स्रोत खोजनी खोजने की खोशीश कोशिश करे(कर रही हो). मैंने फिर से विचित्र आवाज़ सुन ली, फिर आवाज़ की और ओर टोर्च जलाया. टोर्च की रौशनी रोशनी में दो आँखें चमकनी लगीं. अब मैं काफी डर बैठा.

    फिर अचानक जो दो चमकीली आँखें मेरे मेरी और ओर दौरनी दौड़ने लगीं. मुझे उम्मीद पता नहीं था  की क्या वे मेरी कुत्तिया की थीं या कोई(किसी) और जानवर की. अँधेरे से मेरी कुत्तिया के कस रूप ने दिखाई दिया और मुझे काफी राहत हुआ मिली (या हुई) .
    हम दोनों अन्दर आये, और मैंने फैलसा किया की आज की रात फिर से बाहर नहीं जाऊँगा.

     

    आज की रात

    आज मैंने दोस्तों को अपने घर  दावत पे बुलाया. हमने खाना बनाया फिर मेरे घर के पीछेवाले वन में घूमने गए. धुप अभी भी था. थोड़ा घूमने के बाद हमलोग अन्दर आ गय फिर  चाय बनायी. और एक साथ  बैठकर   बातचीत करते हुए चाय पी. 

    एक घंटे बाद वे चले गए फिर मैं अपनी कुत्तिया के साथ बाहर टहल ने गया. साथ मे  टोर्च रख लिया. अब तक काफी अँधेरा चुका था, और अँधेरे के कारन( actually here न is different, i didn't find the font) दो तीन मीटर ही देख सकता था . एक आवाज आई( dont use वाणी it is unappropriate for this place )  , और मैं और मेरी कुत्तिया डर गए. वह आवाज़ सुनकर भाग गयी, जैसे की वह आवाज का स्रोत खोजनी की खोशीश कर रही हो . मैंने फिर से विचित्र आवाज़ सुनी, तब मैंने  आवाज की और टोर्च जलाया. टोर्च की रौशनी में दो आँखें चमकनी लगीं. तब मैं काफी डर गया. 

     

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