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पिछले साल भारत में

पिछले साल मैंने छे महीने भारत में गुज़ारे. यह छे महीने मेरे जीवन के सबसे खुश और दिलचस्प थे. मैं कुछ अपने सफ़र के बारे में बताता हूँ:
भारत जाने के पहले मैं दो सालों से हिन्दुस्तानी रेस्तारांत में काम कर रहा था. मैं प्रमुख हलवाई था, पर मुझे और हिन्दुस्तानी खाने का ज्ञान चाहिए था. मुझे सब भोजन बना सकता था, परन्तु जो खाना भारती लोगों के हाथों से बनाया जाता है, वह ही मैंने कभी नहीं चक लिया.
बात तो थी की हालांकि मैं खाना बना सकता था फिर भी मुझे निश्चय नहीं था की चाहे स्वाद सही की नहीं.
और इसी काम मिलने के पहले मुझे भारती धर्मों में बड़ा दिलचस्प था, यानी की मैं भागवाद गीता और उपनिषद् पढ़के भारत जाने का तमन्ना हुआ. मुझे लगा की भारत में एक आध्यात्मिक निधि बसा था, और वह निधि मेरा इंतज़ार कर रहा था.
बस इनके कारण मैंने पैसे बचाकर टिकेट खरीदा, फिर उधर हवाई जहाज़ से चला पढ़ा.
मैं महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, पुनजब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, आंध्र प्रदेश, तमिल नाडू, और कर्नाटका गया. उन देशों में काफी शेहेरों गया. मेरे मनपसंद पुणे, अमृतसर, शिमला, ऋषिकेश, वाराणसी, विसाखापत्नम और बांगालोर थे.
अपने सफ़र में मैंने कई होटलों और रेस्तारंतों में कार्य किया. मुझे ढेर सारे दोस्त मिले, और मेरी ज़िन्दगी बदली गयी.
भारत जाने के पहले मुझे कई हिंदी शब्द आते थे, और मैं पढ़ सकता था आदि लिख सकता था. मेरे घूमने के दौरान अपनी हिंदी में काफी सुधार हुआ. वापस आने से मैं अपनी फुर्सत में अपनी पढ़ाई जारी रखा, और आशा करता हूँ की मेरी हिंदी बढ़ते जायेगी!

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    पिछले साल भारत में

    पिछले साल मैंने छे छः महीने भारत में गुज़ारे. यह छे छः महीने मेरे जीवन के सबसे खुश और दिलचस्प थे. मैं कुछ अपने सफ़र के बारे में बताता हूँ:
    भारत जाने के पहले मैं दो सालों से हिन्दुस्तानी रेस्तारांत में काम कर रहा था. मैं प्रमुख हलवाई था, पर मुझे और हिन्दुस्तानी खाने का ज्ञान चाहिए था. मुझे  मैं सब सारे व्यंजन (भोजन) बना सकता था, परन्तु जो खाना भारती लोगों के हाथों से बनाया जाता है, वह (ही) मैंने कभी नहीं चक लिया चखा था.
    बात यह थी कि हालांकि मैं खाना तो बना सकता था पर फिर भी मुझे निश्चय(पक्का पता) नहीं था कि चाहे स्वाद सही है  या(कि) नहीं.
    और इसी यह काम मिलने से (के) पहले मुझे भारती धर्मों में बड़ी दिलचस्पी थी, यानि कि मैं मेरी मुझे भग्वद  गीता और उपनिषद् पढ़के भारत जाने का तमन्ना हुआ हुई. मुझे लगा कि भारत में एक आध्यात्मिक निधि बसी थी, और वह निधि मेरा इंतज़ार कर रही थी.
    बस इनके कारण मैंने पैसे बचाकर टिकिट खरीदा, फिर (उधर) हवाई जहाज़ से चला पड़ा.
    मैं महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और कर्नाटका गया. उन प्रदेशों के काफी हेरों में गया. मेरे मनपसंद पुणे, अमृतसर, शिमला, ऋषिकेश, वाराणसी, विसाखापत्नम और बांगालोर थे.
    अपने सफ़र में मैंने कई होटलों और रेस्तारंतों में कार्य किया. मुझे ढेर सारे दोस्त मिले, और मेरी ज़िन्दगी बदली गयी.
    भारत जाने के पहले मुझे कई हिंदी शब्द आते थे, और मैं पढ़ सकता था लिख सकता था आदि. मेरे घूमने के दौरान अपनी मेरी हिंदी में काफी सुधार हुआ. वापस आने पर मैं अपनी फुर्सत में अपनी पढ़ाई जारी रखा, और आशा करता हूँ कि मेरी हिंदी बढ़ते बेहतर होती जायेगी!

     

    उम्दा लेखन :)

     

    पिछले साल भारत में

    पिछले साल मैंने छह महीने भारत में गुज़ारे. यह  छह महीने मेरे जीवन के सबसे खुश और दिलचस्प थे. मैं कुछ अपने सफ़र के बारे में बताता चाहता हूँ: 

    भारत आने के पहले मैं दो सालों से हिन्दुस्तानी रेस्तारांत में काम कर रहा था. मैं प्रमुख हलवाई था, पर मुझे और हिन्दुस्तानी खाना बनाने  का ज्ञान चाहिए था. मैं सब प्रकार के भोजन बना सकता था, परन्तु जो खाना भारतीय लोगों के हाथों से बनाया जाता है, वह  मैंने कभी नहीं चखा था. 

    बात  यह  थी की हालांकि मैं खाना बना सकता था फिर भी मुझे निश्चय नहीं था की चाहे स्वाद सही है की या नहीं. 

    और इसी यह काम मिलने के से पहले मुझे भारतीय धर्मों में बड़ी दिलचस्पी थी, (ESLEYE) मुझे भागवाद गीता और उपनिषद् पढ़कर भारत जाने की (तमन्ना this is urdu word not hindi) इच्छा हुई. मुझे लगा की भारत में एक आध्यात्मिक निधि बसी है , और वह निधि मेरा इंतज़ार कर रही है

    बस इसी कारण मैंने पैसे बचाकर टिकिट खरीदा, फिर उधर हवाई जहाज़ से चला पङा.
    मैं महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, आंध्र प्रदेश, तमिल नाडू, और कर्नाटका गया. उन देशों राज्यों में क शहरो को गया. मेरा मनपसंद शहर पुणे, अमृतसर, शिमला, ऋषिकेश, वाराणसी, विसाखापत्नम और बांगालोर है.
    अपने सफ़र में मैंने कई होटलों और रेस्तारंतों में कार्य किया. मेरे ढेर सारे दोस्त बने, और मेरी ज़िन्दगी बदली गयी.
    भारत जाने के पहले मुझे कई हिंदी शब्द आते थे, और मैं पढ़ आदि लिख सकता था. घूमने के दौरान अपनी मेरी हिंदी में काफी सुधार हुआ. वापस आने से के बाद मैं अपनी फुर्सत में अपनी पढ़ाई जारी रखी, और आशा करता हूँ की मेरी हिंदी बढ़ते  सुधरती जायेगी!

     

    you said coorect. Theses towns are so good; I like,too. Now, I am in Pune

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