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वाल्मीकि के बारे में

मैं कई दिनों से व्यस्त हो रहा हूँ. दो दिन पहले मेरा अभिन्न मित्र आया था, उसका नाम कोरी है. हम वही शेहेर में रहते थे, पर आजकल वह मेरे यहाँ से लगबग २०० मील रहता है. इसलिए हम अक्सर एक दुसरे से नहीं मिलते.
मैं उसका सत्कार कर रहा हूँ. उसका आने से मैं विशेष भोजन बना रहा हूँ. हम दोनों ने ज्यादा खाना खाया है. आज शाम को मैंने नहीं खाया क्योंकि मेरा पेट थोडा गढ़बढ़ हो गया था.
पहले दो दिनों से बारिश हो रही है. इस मौसम में, हमेशा से, पेड़ों के पत्तों के रंग बदल रहे है. पत्ते लाल, संतरा, पीला, हरा, और भूरा हैं. सुन्दर तमाशा है.
कल मैंने वाल्मीकि के बारे में पढ़ा. वह रामायण का रचयिता था. मैं ऐसा जाना, पर मुझे नहीं पता कि वाल्मीकि वन में रहता था और वह अपने और अपने परिवार के पेट भरने के लिए यात्री लोगों को मारकर चुराता था. एक दिन सात ऋषि वन में घूम रहे थे. जब वाल्मीकि ने उनको देखा तो उसने चिल्लाकर कहा "यह जंगल मेरा राज्य है. जो भी तुम्हारे पास है, वह मुझे दे दो. जल्दी से!" ऋषि लोगों के पास बस लोटे थे. वे झगडा करना नहीं चाहते थे इसलिए उन्होंने उपने लोटे वाल्मीकि को दिए. एक ऋषि ने देते ही वाल्मीकि से कहा "यह जंगल आपका है. ठीक है. पर क्या यात्री लोगों को संतानी कि आवश्यकता है?"
वाल्मीकि ने बोला "जिस तरह से मैं अपनी परिवार को खिलाता हूँ, वह तुम्हारा लेना देना नहीं है. इस बात छोड़ दो और जाओ यहाँ से."
ऋषि गंभीरता से बोले "आप अपनी परिवार से पूछें कि क्या तुम लोग इन पापों का उत्तरदायित्व बांटना चाहते हो?"
वाल्मीकि ने बोला "ठीक है, मैं चलता हूँ. उससे पूछकर वापस आता हूँ."
जब वाल्मीकि लौट आया, तब वह उदास लग रहा था. उसने कहा कि उसकी परिवार इन पापों का जिम्मेदारियां नहीं चाहते और अब वह मोक्ष मिलने के लिए क्या करे? सात ऋषि लोगों ने समझाया: राम नाम का जपा करो. सब पाप राम का जपा में निकलेंगे.
वाल्मीकि ने ऐसा ही किया, और जब वह बैठता था, तब दीमकों ने उसके आस पास एक दीवार खडा की. संस्कृत में दीमकों कि दीवारों को "वाल्मिक" कहते है, इसलिए वाल्मीकि यही नाम कहा जाता है.

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    वाल्मीकि के बारे में
    मैं कई दिनों से व्यस्त चल रहा हूँ. दो दिन पहले मेरा गहेरा मित्र आया था, उसका नाम कोरी है. हम एक ही शहर में रहते थे, पर आजकल वह मेरे यहाँ से लगभग २०० मील दूर रहता है. इसलिए हम अक्सर एक दूसरे से नहीं मिल पाते.
    मैं उसका सत्कार कर रहा हूँ. उसका आने से मैं विशेष भोजन बना रहा हूँ. हम दोनों ने अत्यधिक खाना खाया है. आज शाम को मैंने नहीं खाया क्योंकि मेरा पेट ठोस गड़बड़ हो गया था.
    पिछले दो दिनों से बारिश हो रही है. इस मौसम में, हमेशा की तरह, पेड़ों के पत्तों के रंग बदल रहे हैं. पत्ते लाल, नारंगी, पीले, हरे, और भूरे हैं. सुन्दर द्रश्य है.
    कल मैंने वाल्मीकि के बारे में पढ़ा. मैं जाना कि वह रामायण का रचयिता थे, परन्तु मुझे नहीं पता था कि वाल्मीकि वन में रहते थे और वह अपने और अपने परिवार के पेट भरने के लिए यात्री लोगों को मारकर उनकी चीज़ें चुराते थे. एक दिन सात ऋषि वन में घूम रहे थे. जब वाल्मीकि ने उनको देखा तो उसने चिल्लाकर कहा "यह जंगल मेरा राज्य है. जो भी तुम्हारे पास है, वह मुझे दे दो. जल्दी से!" ऋषियों के पास बस लोटे थे. वे झगडा करना नहीं चाहते थे इसलिए उन्होंने अपने लोटे वाल्मीकि को दे दिए. एक ऋषि ने देते ही वाल्मीकि से कहा "यह जंगल आपका है. ठीक है. पर क्या आपको यात्रियों को सताने की आवश्यकता है?"
    वाल्मीकि ने कहा "जिस तरह से भी मैं अपने परिवार को खिलाता हूँ, यह तुम्हारी समस्या नहीं है. इस बात छोड़ दो और जाओ यहाँ से."
    ऋषि गंभीरता से बोले "आप अपने परिवार से पूछें कि क्या वे लोग इन पापों का उत्तरदायित्व बाटना चाहते हैं?"
    वाल्मीकि ने कहा "ठीक है, मैं चलता हूँ. उनसे पूछकर वापस आता हूँ."
    जब वाल्मीकि लौट कर आया, तब वह उदास लग रहे थे. उसने कहा कि उनका परिवार इन पापों का जिम्मेदारियां नहीं चाहता और अब वह मोक्ष मिलने के लिए क्या करे? सात ऋषियों ने समझाया: राम नाम का जपा करो. सब पाप राम जाप से नष्ट हो जायेंगे.
    वाल्मीकि ने ऐसा ही किया, और जब वह बैठे थे, तब दीमकों ने उनके आस पास एक दीवार कड़ी कर दी. संस्कृत में दीमकों कि दीवारों को "वाल्मिक" कहते है, इसी लिए उन्हें वाल्मीकि के नाम से जाना जाता है.

     

    वाल्मीकि के बारे में

    मैं कई दिनों से व्यस्त हो चल रहा हूँ. दो दिन पहले मेरा अभिन्न मित्र आया था, उसका नाम कोरी है. हम वही शेहेर शहर में रहते थे, पर आजकल वह मेरे यहाँ से लगबग लगभग २०० मील दूर रहता है. इसलिए हम अक्सर एक दुसरे दूसरे से नहीं मिलते(या मिल पाते).
    मैं उसका सत्कार कर रहा हूँ. उसका आने से मैं विशेष भोजन बना रहा हूँ. हम दोनों ने ज्यादा खाना खाया है. आज शाम को मैंने नहीं खाया क्योंकि मेरा पेट थोडा गढ़बढ़ गड़बड़ हो गया था.
    पहले पिछले दो दिनों से बारिश हो रही है. इस मौसम में, हमेशा से की तरह , पेड़ों के पत्तों के रंग बदल रहे है. पत्ते लाल, संतरा नारंगी, पीले, हरे, और भूरे हैं. सुन्दर तमाशा दृश्य है.
    कल मैंने वाल्मीकि के बारे में पढ़ा. वह रामायण का रचयिता था(थे is better here, because of respect). मैंने ऐसा जाना, पर मुझे नहीं पता था कि वाल्मीकि वन में रहता था(रहते थे) और वह अपने और अपने परिवार के पेट भरने के लिए यात्री लोगों को मारकर (उनकी चीज़ें) चुराता था(चुराते थे). एक दिन सात ऋषि वन में घूम रहे थे. जब वाल्मीकि ने उनको देखा तो उसने चिल्लाकर कहा "यह जंगल मेरा राज्य है. जो भी तुम्हारे पास है, वह मुझे दे दो. जल्दी से!" ऋषि लोगों(या ऋषियों) के पास बस लोटे थे. वे झगडा करना नहीं चाहते थे इसलिए उन्होंने उपने लोटे वाल्मीकि को दे दिए. एक ऋषि ने देते ही वाल्मीकि से कहा "यह जंगल आपका है. ठीक है. पर क्या आपको यात्री लोगों(या यात्रियों) को संतानी सताने कि की आवश्यकता है?"
    वाल्मीकि ने बोला कहा( 'कहा' 'बोला' से बेहतर है यहाँ )"जिस तरह से भी मैं अपने परिवार को खिलाता हूँ, वह तुम्हारा लेना देना नहीं है(से तुम्हें क्या लेना देना(या तुम्हें क्या करना?)/यह आपकी समस्या नहीं है). इस बात छोड़ दो और जाओ यहाँ से."
    ऋषि गंभीरता से बोले "आप अपने परिवार से पूछें कि क्या तुम(या वे) लोग इन पापों का उत्तरदायित्व बांटना चाहते हो(हैं)?"
    वाल्मीकि ने कहा "ठीक है, मैं चलता हूँ. उसे पूछकर वापस आता हूँ."
    जब वाल्मीकि लौट कर आया, तब वह उदास लग रहा था. उसने कहा कि उसका परिवार इन पापों का जिम्मेदारियां नहीं चाहता और अब वह मोक्ष मिलने के लिए क्या करे? सात ऋषि लोगों(ऋषियों) ने समझाया: राम नाम का जपा करो. सब पाप राम का जपा में निकलेंगे जाप से नष्ट हो जायेंगे.
    वाल्मीकि ने ऐसा ही किया, और जब वह बैठता था(बैठते थे), तब दीमकों ने उसके(उनके) आस पास एक दीवार खड़ी की(खड़ी कर दी). संस्कृत में दीमकों कि दीवारों को "वाल्मिक" कहते है, इसलिए वाल्मीकि यही नाम कहा जाता है(इसी लिए उन्हें वाल्मिकी कहा जाता है या उन्हें वाल्मिकी के नाम से जाना जाता है).

     

    वाल्मिकी बोले/वाल्मिकी ने कहा, कहानियों में ऐसा ही लिखा जाता है और यह सुनने पढने में अच्छा लगता है, आप व्याकरण की दृष्टि से बिलकुल सही थे.

     

    और परिवार पुल्लिंग(masculine) शब्द है, आपने उसका उपयोग स्त्रीलिंग की तरह कर दिया :)

     

    वाल्मीकि के बारे में

    मैं कई दिनों से व्यस्त हो रहा हूँ. दो दिन पहले मेरा अभिन्न (this word is realted to physical part) (घन्षिट or परम) मित्र आया था, उसका नाम कोरी है. हम एक ही शहर में रहते थे, पर आजकल वह मेरे यहाँ से लगबग २०० मील  दुर रहता है. इसलिए हम अक्सर एक दुसरे से मिल नहीं  पाते. 

    मैंने उसका सत्कार किया . उसका आने पर मैंने विशेष किस्म का भोजन बनाया . हम दोनों ने ज्यादा खाना खाया लिया (  हम दोनों  अत्यधिक भोजन ग़हण कर लिया you can also write. this sentence contains pure hindi word. ). आज शाम को मैंने नहीं खाया क्योंकि मेरा पेट थोडा गढ़बढ़ हो गया था. 

    पहले  पिछले दो  दिनों से बारिश हो रही है(I confuse, should you write in past tense or present?). इस मौसम में,( हमेशा you can use it. but not relevant. instead of that put) अक्सर , पेड़ों के पत्तों का रंग बदलता है. पत्ते लाल, संतरा, पीला, हरा, और भूरा हो जाते  हैं.  (तमाशा this word contain -tiv sense. such as if you saw a skermish or quarral than use that work.)सुन्दर दृश्य है. 

    कल मैंने वाल्मीकि के बारे में पढ़ा. वह रामायण के  रचयिता थे . मैं ऐसा जाना पर मुझे नहीं पता कि वाल्मीकिजी वन में रहते था थे ( In english तुम and आप word means you but in hindi its use in different way. आप  use for respect to elder person but तुम word use withs friends and younger people . Here valmiki ji was a great person so, In term of respect we won't use था ) और वह अपने और अपने परिवार के पेट भरने के लिए यात्री लोगों को मारकर फिर उसके चुराते थे  एक दिन सात ऋषि वन में घूम रहे थे. जब वाल्मीकि ने उनको देखा तो उसने चिल्लाकर कहा "यह जंगल मेरा राज्य है. जो भी तुम्हारे पास है, वह मुझे दे दो. जल्दी से!" ऋषि लोगों के पास बस लोटे थे. वे झगडा करना नहीं चाहते थे इसलिए उन्होंने उपने लोटे वाल्मीकि को दिए. एक ऋषि ने देते ही वाल्मीकि से कहा "यह जंगल आपका है. ठीक है.  ( पर क्या यात्री लोगों को संतानी कि आवश्यकता है?" i don't understand this sentence)

    वाल्मीकि  वाल्मीकिजी  बोले "जिस  इस तरह से मैं अपने परिवार को खिलाता हूँ, इससे तुम्हारा लेना देना नहीं है. इस बात छोड़ दो और जाओ यहाँ से." 

    ऋषिमुनी  गंभीरता से बोले " क्या आप अपने परिवार से पूछा कि  तुम लोग इन पापों के उत्तरदायित्व को बांटना चाहते हो?" 

    वाल्मीकिजी ने बोला "ठीक है, मैं पूछता हूँ. और पूछकर वापस आता हूँ." 

    जब वाल्मीकिजी लौट आए, तब वह उदास लग रहे थे. उन्होने कहा कि उसके परिवार ने इन पापों की जिम्मेदारियां नहीं लेना चाहते और अब वह मोक्ष मिलने के लिए क्या करे? सात ऋषि लोगों ने समझाया: राम नाम का जपा करो. सब पाप राम के जपा में निकलेंगे  से नष्ट हो जायेगे .
    वाल्मीकिजी  ने ऐसा ही किया, और जब भी वह बैठते थे, तब दीमकों ने उनके आस पास एक दीवार खडी की. संस्कृत में दीमकों कि दीवारों को "वाल्मिक" कहते है, इसलिए वाल्मीकिजी  यही नाम से जाने जाते  है.

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