क्या आपको थिएटर में मूवीज देखना पसंद है?
लेकिन जब टीवी में ही इतने सारे चैनल्स के आते ही मुझे थिएटर में जाना नुकसान देई लगने लगा।
क्या आप मुझसे सहमत हो? आजकल हिंदी ,तेलुगु ,इंग्लिश आदि टीवी चैनल्स में ढेर सारे मूवीज देखने को मिल जाते हैं . तो थिएटर जाने का कष्ट क्यों करे ? फुजूल में पैसे बर्बाद हो जायेंगे ना। और फिर थीं घंटे बिना कहीं जाए ,एक ही जगह टिके रहना भी मेरे लिए नामुमकिन सा हैं। और अगर आपके पास कंप्यूटर है तो , मूवीज डाउनलोड कर सकते हो। सीडी खरीदकर भी देख सकते हो न? इसीलिए मैं आजकल थिएटर जाना ही बंद कर दिया . मेरे घर में तो ऐसा शो देता हूँ की मैं वाकई सुधर गया और पैसों का मूल्य समझ गया।। लेकिन असल में तो मेरे थिएटर न जाने का कारण ये है। मई बहुत ही चालू हूँ न।
लेकिन कभी कभी लगता है की थिएटर में मूवीज देखने का अलग ही मज़ा है। जैसे की ..अगर आप अपने पसंदीदा हीरो या हीरोइन के मूवीज को देखना चाहते हो तो क्या आप किसी भी मूल्य पर थिएटर जाना त्याग सकते हो? मेरे साथ भी एइसा ही हुआ।।
जब श्रीदेवी जी एक्टिंग करना बंद करदी और बोनी कपूर को ब्याह करके घरबार सँभालने लगी तो मेरा उम्र तेरह साल था . लेकिन मैं बचपन से ही उनके मूवीज टीवी में देखकर , बड़े परदे पर उनकी अदाकारी देखना चाहता था। लेकिन मेरे बड़े होते ही उन्हों ने एईसी एक निश्चय कर ली . लो ..इतने वर्षों के बाद अगर वो फिर से एक मूवी की तो क्या मैं उसे अनदेखी कर सकता हूँ . अब मैं अपने बड़ों के ऊपर निर्भर नहीं हूँ , की कोई मुझे उनके मूवी लेके जाए।
तो खुद भाग पड़ा.और मूवी का स्टोरी भी कुछ आजकल के मेरे प्रयासों के बारे में ही है।
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क्या आपको थिएटर में मूवीज देखना पसंद है?
मैं अपने कॉलेज के दिनों में थिएटर जाके मूवीज देखने के लिए तरसता था।
लेकिन जब टीवी में ही इतने सारे चैनल्स के आते ही मुझे थिएटर में जाना नुकसान देई देह लगने लगा।
क्या आप मुझसे सहमत हो? आजकल हिंदी ,तेलुगु ,इंग्लिश आदि टीवी चैनल्स में ढेर सारे(सारी) मूवीज देखने को मिल जाते(जाती) हैं . तो थिएटर जाने का कष्ट क्यों करे ? फुजूल(फ़िज़ूल) में पैसे बर्बाद हो जायेंगे ना। और फिर थीं तीन घंटे बिना कहीं जाए ,एक ही जगह टिके रहना भी मेरे लिए नामुमकिन सा है। और अगर आपके पास कंप्यूटर है तो , मूवीज डाउनलोड कर सकते हो। सीडी खरीदकर भी देख सकते हो न? इसीलिए मैं आजकल थिएटर जाना ही बंद कर दिया . मेरे घर में तो ऐसा शो देता हूँ की मैं वाकई सुधर गया और पैसों का मूल्य समझ गया।। लेकिन असल में तो मेरे थिएटर न जाने का कारण ये है। मई मैं बहुत ही चालू हूँ न।
लेकिन कभी कभी लगता है की कि थिएटर में मूवीज देखने का अलग ही मज़ा है। जैसे की ..अगर आप अपने पसंदीदा हीरो या हीरोइन के मूवीज को देखना चाहते हो तो क्या आप किसी भी मूल्य पर थिएटर जाना त्याग सकते हो? मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ।।
जब श्रीदेवी जी एक्टिंग करना बंद कर दी और बोनी कपूर को ब्याह करके घरबार सँभालने लगी तो मेरा मेरी उम्र तेरह साल था थी. लेकिन मैं बचपन से ही उनके मूवीज टीवी में देखकर , बड़े परदे पर उनकी अदाकारी देखना चाहता था। लेकिन मेरे बड़े होते ही उन्हों ने ऐसा एक निश्चय कर लिया(जब आप 'ने' लगाते हैं तो वर्ब(क्रिया) का जेंडर(लिंग) सब्जेक्ट(कर्त्ता) नहीं तय करता ) . लो ..इतने वर्षों के बाद अगर वो फिर से एक मूवी की तो क्या मैं उसे अनदेखा कर सकता हूँ . अब मैं अपने बड़ों के ऊपर निर्भर नहीं हूँ , कि कोई मुझे उनके मूवी लेके जाए।
तो खुद भाग पड़ा.और मूवी का स्टोरी भी कुछ आजकल के मेरे प्रयासों के बारे में ही है।
u have a good writing style. :D
मैं बहुत कम फिल्में देखने वालों हूँ, पर(शायद इसी लिए) मेरा मानना है कि थियेटर का मज़ा ही कुछ और है। साउंड सिस्टम, बड़ा पर्दा सबसे महत्वपूर्ण तत्व हैं 'लोग', सभी जब एक ही काम कर रहे होते हैं तो कई बार दृश्यों का प्रभाव बढ़ जाता है. हालांकि जो हमेशा थिएटर जाते रहते हैं शायद वे इससे सहमत ना हों। जो जिस चीज़ के लिए बनाया गया हो उसमें कुछ और ही बात होगी ना?
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