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भारतीय राष्ट्रीय एकता दिवस।

 

आज भारत के पूर्व प्रधान मंत्री श्रीमती इंदिरा गाँधी जी का जन्म दिन है। आज के दिन को भारत में राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाया जाता है। मुझे लगता है की आजकल भारतदेश वाकई कई समाजिक उथल पुथल से गुज़र रही है। बहुत प्रयास के बाद हम अंग्रेजों को भारत से निकलने में सफल हो गए थे। लेकिन अभी भी ये देश भाषाएँ , प्रदेशों , प्रान्तों ,उत्तर, दक्षिण ,मज़हब,धर्म , जाती आदि के तौर पर बंट कर ही रह गया है। इस देश में गरीबी , बेरोज़गारी आदि बहुत जटिल समस्याएँ है। मगर पड़े लिखे लोग भी इस मद्दे पर ध्यान देने से ज्यादा अपने जाती के लोगों को ही तरक्की करते हुए देखने में मज़ा लेते हैं। बहुत अफ़सोस की बात है। केवल अफ़सोस ही नहीं मुझे तो ऐसे लोगों से घ्रणा है।राष्ट्रीय एकता दिवस को मानना इस देश में गणतंत्र दिवस को मनाये जाने वाले जितना मुख्य और अवश्य बना देना चाहिए ,ताकि आगे चलकर ये बेकार की "अलग प्रदेश' के मांगे ख़तम हो जाए। श्रीमती इंडी गाँधी जी वाकई में इस देश के लिए बहुत कुछ की है। उसे "गूंगी गुडिया "कहते हुए ताना देते थे लोग। मगर अगर उन जैसी एक राष्ट्रीय वादी महिला प्रहण मंत्री न बनी होती तो मुझे लगता है के ये देश कब की के हिस्सों में बांटकर रह जाती थी। इस मुश्किल दौर में गुज़र थे हुए भारत को राष्ट्रीय तौर पर एक जुट होना बहुत ही आवश्यक है।अरे अपने पडोसी देशों को देखकर तो सीखो ना। चीन अग्रणी होती ही जा रही है। दिन ब दिन हम कितना पीछा रह जा रहे हैं।आन्ध्र प्रदेश में तेलंगाना की मांग हैं। आपको लगता होगा की ये जायीज़ है। मगर ये सुनते हुए आप भौचक्के से रह जायेंगे की ये मांग किस के आधार पर किया जारहा हा। मकामी बोली

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    भारतीय राष्ट्रीय एकता दिवस।

    आज भारत की पूर्व प्रधान मंत्री श्रीमती इंदिरा गाँधी जी का जन्म दिन है। आज के दिन को भारत में राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाया जाता है। मुझे लगता है की आजकल भारतदेश वाकई कई समाजिक उथल पुथल से गुज़र रहा है। बहुत प्रयास के बाद हम अंग्रेजों को भारत से निकलने में सफल हो पाए (या सफल हुए) थे। लेकिन अभी भी ये देश भाषाएँ , प्रदेशों , प्रान्तों ,उत्तर, दक्षिण ,मज़हब,धर्म , जाति आदि के तौर पर बंट कर ही रह गया है। इस देश में गरीबी , बेरोज़गारी आदि बहुत जटिल समस्याएँ है। मगर पढ़े लिखे लोग भी इस मुद्दे पर ध्यान देने से ज्यादा अपने जाति के लोगों को ही तरक्की करते हुए देखने में मज़ा लेते हैं। बहुत अफ़सोस की बात है। केवल अफ़सोस ही नहीं मुझे तो ऐसे लोगों से घृणा है।राष्ट्रीय एकता दिवस को मानना इस देश में गणतंत्र दिवस को मनाये जाने वाले जितना मुख्य और आवश्यक बना देना चाहिए ,ताकि आगे चलकर ये बेकार की "अलग प्रदेश' के मांगें ख़तम हो जाएँ । श्रीमती इंदिरा गाँधी जी वाकई में इस देश के लिए बहुत कुछ की हैं। उसे "गूंगी गुडिया "कहते हुए ताना देते थे लोग। मगर अगर उन जैसी एक राष्ट्रीय वादी महिला प्रहण मंत्री न बनी होती तो मुझे लगता है के ये देश कब की के हिस्सों में बांटकर रह जाती थी। इस मुश्किल दौर में गुज़र थे हुए भारत को राष्ट्रीय तौर पर एक जुट होना बहुत ही आवश्यक है।अरे अपने पडोसी देशों को देखकर तो सीखो ना। चीन अग्रणी होता ही जा रहा  है। दिन ब दिन हम कितना पीछे (रह) होते जा रहे हैं।आन्ध्र प्रदेश में तेलंगाना की मांग है। आपको लगता होगा कि ये जायज़ है। मगर ये सुनते हुए(सुनकर) आप भौचक्के से रह जायेंगे कि ये मांग किस के आधार पर की जा रही है। मकामी बोली

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