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वाल्ल्मार्ट हाय हाय . पूंजीवादी मुर्दाबाद।

 

आज भारत के संसद में रिटेल सेक्टर में विदेशी पूंजी विनिवेश के मुद्दे पर ज़ोरदार चर्चा हुई थी।
अधिकार पक्ष का कहना है कि ऐसे विदेशी विनिवेश से भारत में रोजगारी बढ़ेगी और ग्राहक को कम दाम में सामान मिलेगी। विपक्ष दल की नेता श्रीमती सुषमा स्वराज ने ईंट का जवाब पत्थर से दिया था। एक एक करके सर्कार का निर्णय को गलत साबित करने में सफल हो गई . वाल्ल्मार्ट जैसे बड़े संस्थाओं से मामूली छोटी दुकानदारों को बहुत नुकसान होगी। और तो और क्या हम किस चीज़ को कितने रूपये में ख़रीदे , इसे तय करने का अधिकार एक विदेशी वर्तक को सौंप कर सुखी रह सकते हैं?
मुझे तो ये वाल्ल्मार्ट, मच्दोनाल्ड,स्तार्बुच्क,टॉमी हिल्फ्गिएर ये सब कंपनिया बरसों पहले की bristish east india company की याद दिला रही है।क्या फिर से हमें गोरों की चापलूसी करना हैं . हाय हाय . महात्मा गाँधी जी ने स्वदेशी आन्दोलन करके ,विदेशी वस्तों का बहिष्कार किया था . न सिर्फ वस्त्रों की ,आगे चलकर सभी विदेशी उत्पादनों से इस देश को मुक्त कराया है उनहोंने। इस के कारन आज इस देश में "मारुती उद्योग" "टाटा" , "tvs ,"अम्रुथंजन", "bpl ," नवरतन कम्पनीज" आदि का विकास हुआ और देश अपने आप आगे बढ़ गई . जिस नीती को विपक्ष में होते हुए ये कांग्रेसी गलत समझते है वह अधिकार में आते ही सही कैसे बन जाएगी।
macdonald कंपनी भारतीय किसानों से आलू खरीदने से ये कहते हुए इंकार करती है की ,भारत के अल्लो french fries बनाने के लिए काफी छोटे हैं . इससे हर साल भारत के किसानों को बहुत नुक्सान होरहा है और मच्दोनाल्ड को लाभ .
ओबामा जी भारत में bpo और कॉल centers के खिलाफ बोलते हैं मगर अपने देश की कंपनी को india में जाते खुश है।

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    वालमार्ट हाय हाय . पूंजीवादी मुर्दाबाद।

    आज भारत के संसद में रिटेल सेक्टर में विदेशी पूंजी विनिवेश के मुद्दे पर ज़ोरदार चर्चा हुई थी
    अधिकार  सत्ता पक्ष का कहना है कि ऐसे विदेशी विनिवेश से भारत में रोजगारी बढ़ेगी और ग्राहक को कम दाम में सामान मिलेगा। विपक्ष दल की नेता श्रीमती सुषमा स्वराज ने ईंट का जवाब पत्थर से दिया था। एक एक करके सरकार के निर्णय को गलत साबित करने में सफल हो गई . वालमार्ट जैसीड़ी संस्थाओं से मामूली छोटे दुकानदारों को बहुत नुकसान होगा। और तो और क्या हम किसी चीज़ को कितने रूपये में ख़रीदे , इसे तय करने का अधिकार एक विदेशी वर्तक विक्रेता को सौंप कर सुखी रह सकते हैं?
    मुझे तो ये वाल्मार्ट, मैकडोनाल्ड,स्तार्बुच्क,टॉमी हिल्फ्गिएर ये सब कंपनिया बरसों पहले की bristish east india company की याद दिला रही हैं।क्या फिर से हमें गोरों की चापलूसी करना हैं . हाय हाय . महात्मा गाँधी जी ने स्वदेशी आन्दोलन करके ,विदेशी वस्तों का बहिष्कार किया था . न सिर्फ वस्त्रों की ,आगे चलकर सभी विदेशी उत्पादनों से इस देश को मुक्त कराया है उनहोंने। इस के कार आज इस देश में "मारुती उद्योग" "टाटा" , "tvs ,"अम्रुथंजन", "bpl ," नवरतन कम्पनीज" आदि का विकास हुआ और देश अपने आप आगे बढ़ गया . जिस नीति को विपक्ष में होते हुए ये कांग्रेसी गलत समझते है वह अधिकार सत्ता में आते ही सही कैसे बन जाएगी।
    macdonald कंपनी भारतीय किसानों से आलू खरीदने से ये कहते हुए इंकार करती है कि ,भारत के अल्लो आलू french fries बनाने के लिए काफी छोटे हैं . इससे हर साल भारत के किसानों को बहुत नुक्सान हो रहा है और macdonald को लाभ .
    ओबामा जी भारत में (के) bpo और कॉल centers के खिलाफ बोलते हैं मगर अपने देश की कंपनी को india में जाते देख खुश है।

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