मेरे मामा
दूसरी याद आती है क्रिसमस के साथ; अपने मामा की याद। वे बहुत ही अच्छे आदमी थे। छे सालों पहले उनका देहांत हुआ। वे हमारे घर से तीन घंटे दूर रहते थे, मगर हर क्रिसमस पर हम सुबह को अपने घर पे क्रिसमस मनाते फिर उनके घर जाते थे। वैसे सारा परिवार उधर मिलकर कोई 2-3 दिनों तक क्रिसमस मनाते थे। मेरे मामा सारे परिवार के कुलपति थे। कभी कभी 60 लोग उनके घर पर थे, और वे अकेले हर किसी के लिए सब खाना पकाते थे। जभी कोई परेशान था तो वह मेरे मामा के पास बैठकर सब बता देता था। मेरे मामा उसको सलाह और आशीर्वाद देते थे।
उनका नाम जॉन था। जब उनका देहांत हुआ मेरी माता जी को बहुत शोक आया। आज भी जब मेरी माता जी मेरे मामा का नाम सुनती हैं तब वे कभी कभी थोड़े रोने लगती हैं। हमको लगता है की जॉन के बिना क्रिसमस अधुरा है, परन्तु हमको विशवास भी है की हालांकि जॉन अवतीर्ण नहीं हैं फिर भी वे हमारे साथ है।
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मेरे मामा
क्रिसमस आनेवाला है। जब भी क्रिसमस का मौसम आता है तब मुझे बचपन की यादें आती हैं। अपने बचपन में मैं पूरे साल क्रिसमस मनाने को उत्सुक रहता था, क्योंकि मैं जो भी उपहार चाहता था उनको सांता से मंगवा सकता था। जब तक मैं नौ साल का था तब तक मैं मानता था कि सांता असली है। फिर एक दिन सुबह मैं जल्दी उठ गया(या उठा) और अपनी माता जी के कमरे में गया। मेरी माता जी मेरे लिए एक तोहफा लपेट रही थीं। वे अचानक आश्चर्य पड़ गयीं, और मुझे चिल्लाने लगीं। मैं कमरे से निकला, और जब क्रिसमस का दिन आया तब मैंने "सांता" से वही उपहार प्राप्त किया। तभी मैं समझ गया कि असल में सांता असली तो नहीं, मेरी माता जी सांता के रूप ले रही थीं।
दूसरी याद आती है क्रिसमस के साथ; अपने मामा की याद। वे बहुत ही अच्छे आदमी थे। छे छः साल पहले उनका देहांत हुआ। वे हमारे घर से तीन घंटे दूर रहते थे, मगर हर क्रिसमस पर हम सुबह को अपने घर पे क्रिसमस मनाते फिर उनके घर जाते थे। वैसे सारा परिवार उधर(वहां) मिलकर कोई 2-3 दिनों तक क्रिसमस मनाता था। मेरे मामा सारे परिवार के कुलपति थे। कभी कभी 60 लोग उनके घर पर होते थे, और वे अकेले ही हर किसी के लिए सब खाना पकाते थे। जब भी कोई परेशान होता (था) तो वह मेरे मामा के पास बैठकर सब बता देता था। मेरे मामा उसको सलाह और आशीर्वाद देते थे।
उनका नाम जॉन था। जब उनका देहांत हुआ मेरी माता जी को बहुत शोक (आया) हुआ। आज भी जब मेरी माता जी मेरे मामा का नाम सुनती हैं तब वे कभी कभी (थोड़ा) रोने लगती हैं। हमको लगता है की जॉन के बिना क्रिसमस अधूरा है, परन्तु हमको विश्वास (भी) है की कि हालांकि जॉन अवतीर्ण नहीं हैं फिर भी वे हमारे साथ है।
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क्रिसमस आनेवाला है। जभी जब भी क्रिसमस का मौसम आता है तब मुझे बचपन की यादें याद आती हैं। अपने बचपन में मैं पूरे साल क्रिसमस मनाने को उत्सुक रहता था, क्योंकि मैं जो भी उपहार चाहता था उनको उसको सांता से मंगवा सकता था। जब तक मैं नौ साल का था तब तक मैं मानता था कि सांता असली/सच में होते है। फिर एक सुबह मैं जल्दी उठाया उठा और अपनी माता जी के कमरे में गया। मेरी माता जी मेरे लिए एक तोहफा लपेट रही थीं। वे अचानक आश्चर्य पड़ गयीं, और मुझे चिल्लाने लगीं, मैं कमरे से निकला, और जब क्रिसमस का दिन आया तब मैंने "सांता" से वही उपहार प्राप्त किया। तभी मैं समझ गया कि असल में सांता असली तो नहीं, मेरी माता जी सांता के रूप ले रही थीं।
दूसरी याद आती है क्रिसमस के साथ; अपने मामा की याद। वे बहुत ही अच्छे आदमी थे। छे साल पहले उनका देहांत हुआ था । वे हमारे घर से तीन घंटे की दूर दूरी पर रहते थे, मगर/लेकिन हर क्रिसमस पर हम सुबह को अपने घर पे पर क्रिसमस मनाते फिर उनके घर जाते थे। वैसे सारा परिवार उधर मिलकर कोई 2-3 दिनों तक क्रिसमस मनाते मनाता थे था । मेरे मामा सारे/पूरे परिवार के कुलपति थे। कभी कभी 60 (सहाठ=60) लोग उनके घर पर होते थे, और वे अकेले हि हर किसी के लिए सब/पूरा खाना पकाते थे। जभी जब भी किसी को कोई परेशान परेशानी था होती थी तो वह मेरे मामा के पास बैठकर सब बता देता था। मेरे मामा उसको सलाह और आशीर्वाद देते थे।
उनका नाम जॉन था। जब उनका देहांत हुआ मेरी माता जी को बहुत शोक आया हुआ । आज भी जब मेरी माता जी मेरे मामा का नाम सुनती हैं तब तो कभी कभी वो थोडा रोने लगती हैं। हमको लगता है की जॉन के बिना क्रिसमस अधुरा है, परन्तु/लेकिन हमको विशवास भी है की हालांकि जॉन अवतीर्ण नहीं हैं फिर भी वे हमारे साथ है।
"Nice Work Daniel,Your Hindi Is Good,Keep It Up"
"Dhanyawaad"
मेरे मामा
क्रिसमस आनेवाला है। जब भी क्रिसमस का मौसम आता है तब मुझे बचपन की यादें आती हैं। अपने बचपन में मैं पूरे साल क्रिसमस मनाने को उत्सुक रहता था, क्योंकि मैं जो भी उपहार चाहता था उनको सांता से मंगवा सकता था। जब तक मैं नौ साल का था तब तक मैं मानता था कि सांता असली है। फिर एक सुबह मैं जल्दी उठा और अपनी माता जी के कमरे में गया। मेरी माता जी मेरे लिए एक तोहफा लपेट रही थीं। वे अचानक आश्चर्य में पड़ गयीं, और मुझ पर चिल्लाने लगीं। मैं कमरे से निकला, और जब क्रिसमस का दिन आया तब मैंने "सांता" से वही उपहार प्राप्त किया। तभी मैं समझ गया कि असल में सांता असली तो नहीं, मेरी माता जी सांता के रूप ले रही थीं। अगर आप कहें " सांता के रूप में वो मेरी माताजी थी "तो ठीक रहेगा।
दूसरी याद आती है क्रिसमस की :अपने मामा की याद। वे बहुत ही अच्छे आदमी थे। छे साल पहले उनका देहांत हुआ। वे हमारे घर से ३ घंटे की दूरी पर रहते थे, मगर हर क्रिसमस पर हम सब सुबह को अपने घर पे क्रिसमस मनाते फिर उनके घर चले जाते थे/जाया करते थे। सारा परिवार उधर मिलकर कोई 2-3 दिनों तक क्रिसमस मनाता था(परिवार एक वचन है)। मेरे मामा सारे परिवार के कुलपति थे। कभी कभी 60 लोग उनके घर पर होते थे/ या उपस्तिथ होते थे , और वे अकेले हर किसी के लिए सब खाना पकाते थे। जभी भी कोई परेशान होता था तो वह मेरे मामा के पास बैठकर सब बता देता था। मेरे मामा उसको सलाह और आशीर्वाद देते थे.
उनका नाम जॉन था। जब उनका देहांत हुआ मेरी माता जी को बहुत शोक हुआ। आज भी जब मेरी माता जी मेरे मामा का नाम सुनती हैं तब वे कभी-कभी रोने लगती हैं। हमको लगता है की जॉन के बिना क्रिसमस अधुरा है, परन्तु हमको विशवास भी है की हालांकि जॉन अवतीर्ण नहीं हैं फिर भी वे हमारे साथ है।
First of al Well done! :) Impressive indeed.
Sorry to know about your Uncle though.
Here are some corrections.
मेरे मामा
क्रिसमस आनेवाला है। जब भी जभी क्रिसमस का मौसम आता है तब मुझे बचपन की यादें आती हैं। अपने बचपन में मैं पूरे साल क्रिसमस मनाने को उत्सुक रहता था, क्योंकि मैं जो भी उपहार चाहता था उनको सांता से मंगवा सकता था। जब तक मैं नौ साल का था तब तक मैं मानता था कि सांता असली है। फिर एक सुबह मैं जल्दी उठाया उठा और अपनी माता जी के कमरे में गया। मेरी माता जी मेरे लिए एक तोहफा लपेट रही थीं। वे अचानक आश्चर्य में पड़ गयीं, (OR वह चौंक गयीं) और मुझे मुझ पर चिल्लाने लगीं। मैं कमरे से निकला निकल गया , और जब क्रिसमस का दिन आया तब मैंने "सांता" से वही उपहार प्राप्त किया। तभी मैं समझ गया कि असल में सांता असली तो नहीं, मेरी माता जी सांता के का रूप ले रही थीं।
दूसरी याद आती है क्रिसमस के साथ; (OR मेरी क्रिसमस से जुड़ी दूसरी याद है। looks better)अपने मामा की याद। वे बहुत ही अच्छे आदमी थे। छे सालों पहले उनका देहांत हुआ (OR हो गया looks better and is more commonly used)। वे हमारे घर से तीन घंटे की दूरी पर रहते थे, मगर हर क्रिसमस पर हम सुबह को अपने घर पे क्रिसमस मनाते फिर उनके घर जाते थे। वैसे सारा परिवार उधर मिलकर कोई 2-3 दिनों तक क्रिसमस मनाते थे मनाता था । मेरे मामा सारे परिवार के कुलपति थे। कभी कभी 60 लोग उनके घर पर थे आ जाते , और वे अकेले हर किसी के लिए सब खाना पकाते थे। जब भी जभी कोई परेशान था होता और होता था
तो वह मेरे मामा के पास बैठकर सब बता देता था। मेरे मामा उसको सलाह और आशीर्वाद देते थे।
उनका नाम जॉन था। जब उनका देहांत हुआ मेरी माता जी को बहुत शोक आया हुआ । आज भी जब मेरी माता जी मेरे मामा का नाम सुनती हैं तब वे कभी कभी थोड़े थोड़ा रोने लगती हैं (Or भावुक हो जाती हैं meaning she gets emotional)। हमको लगता है की जॉन के बिना क्रिसमस अधुरा अधूरा है, परन्तु हमको विशवास भी है की हालांकि जॉन अवतीर्ण नहीं हैं फिर भी वे हमारे साथ है।
Great Attempt! :)
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