धीरे धीरे रे मन धीरे सबकुछ होय , माली सींचे सौ घड़ा ऋतु आय
हम चाहते हैं कि जल्द से जल्द कामियाबी हासिल करें , अच्छे नौकरी प्राप्त करें , और माँ बाप को खुश रखें ,मगर क्या कामियाबी के पीछे भागना चाहिए . मुझे चेतन भगत कि कहावत अक्सर खुश रखती है , " कमियाबी के पीछे नहीं काब्लियत के पीछे भागो , कामियाबी अपने आप घुटने ठेक कर आ जाएगी .
इसीलिए जितना भी मुश्किल क्योँ न हो , मैं अपने आप को जापानी भाषा में काबिल बनाना चाहता हूँ ,ताकि आज नहीं तो कल , किसी न किसी कंपनी मेरी क़ाबलियत कि कद्र करेगी
आज के लिए इतना ही .
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धीरे धीरे रे मन धीरे सबकुछ होय , माली सींचे सौ घड़ा ऋतु आय
मेरे लिए काम करना बहुत आवश्यक है। आजकल मैं बहुत व्यस्त रहता हूँ और व्याकुल भी। जल्द से जल्द जापानी भाषा सीखना चाहता हूँ मगर मुझे बचपन की एक दोहा अक्सर याद आती आता है " धीरे धीरे रे मन धीरे सबकुछ होय , माली सींचे सौ घड़ा ऋतु आये फल होय।"
हम चाहते हैं कि जल्द से जल्द कामियाबी हासिल करें , अच्छे नौकरी प्राप्त करें , और माँ बाप को खुश रखें ,मगर क्या कामियाबी कामयाबी के पीछे भागना चाहिए . मुझे चेतन भगत कि कहावत अक्सर खुश रखती है , " कमियाबी कामयाबी के पीछे नहीं काब्लियत काबिलियत के पीछे भागो , कामियाबी कामयाबी अपने आप घुटने ठेक टेक कर आ जाएगी .
इसीलिए जितना भी मुश्किल क्योँ न हो , मैं अपने आप को जापानी भाषा में काबिल बनाना चाहता हूँ ,ताकि आज नहीं तो कल , किसी न किसी कोई न कोई कंपनी मेरी क़ाबलियत कि कद्र करेगी।(या किसी न किसी कंपनी में मेरी काबिलियत की क़द्र होगी।)
आज के लिए इतना ही .
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